पराली को लेकर सूबे में हल्ला मचा हुआ है लेकिन धुंध को लेकर कोई चिंतिंत नहीं है। ट्रैफिक विंग की ओर से जारी आकंडों के अनुसार इस साल 20 नवंबर तक धुंध के कारण होने वाले 11 सड़क हादसों में 17 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें अधिकतर युवा और बच्चे शामिल हैं, लेकिन अभी तक सरकार ने एडवाइजरी को लेकर कोई कदम नहीं उठाया है।
हर साल सूबे में अक्टूबर के अंत तक या फिर नवंबर के शुरू में धुंध का प्रभाव बढ़ने लगता है। पिछले साल पंजाब हाईकोर्ट ने भी सरकार को आदेश जारी किए थे कि हर वर्ष नवंबर में धुंध का प्रभाव शुरू होने से पहले एडवाइजारी की जाए ताकि लोग धुंध से होने वाले हादसों के प्रति अवेयर रहें। लेकिन इस साल नवंबर के 20 दिन बीत जाने के बावजूद सरकार ने अभी तक कोई एडवाइजरी जारी नहीं की है।
एडवाइजरी में इन बिंदुओं पर होता है काम
- स्कूल बसों पर रिफ्लेक्टर्स लगाना, ड्राइवरों को स्पीड लिमिट कंट्रोल करने के निर्देश के साथ स्कूल प्रबंधन को इस संबंध में अवेयर करना।
- ब्लैक स्पाट्स पहचान करके बैरियर बनाना, रिफ्लेक्टर लगाना और पुलिस कर्मची तैनात।
- लिकं सड़कों पर साइन बोर्ड लगाना
- स्कूल का टाइम टेबल बदलना
- बेवजह खड़ी रहने वाली ट्रैक्टर टाॅली का चालान करना
- पिकअप वाहन को हमेशा तैयार रखना ताकि हादसों के बाद स्पॉट से क्षतिग्रस्त गाड़ियों को तुरंत वहां से हटाया जा सके
- ऐसी जगह जहां हादसे होने का डर हमेशा बना रहता है, वहां एंबुलेंस हमेशा तैयार रखना
- तूंडी वाले ट्रकों पर रिफ्लेक्टर लगाना व ऐसा न करने पर उनके खिलाफ कार्रवाई करना
- ओवर लोडिड ट्रकों का चालान करना
- ट्रैफिक पुलिस बैरियर बनाना।
बॉर्डर एरिया व नहरी क्षेत्रों में होते हैं अधिक हादसे
पंजाब के बाडॅर एरिया में पड़ने वाले शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों और नहरी एरिया में में अधिक हादसे होते हैं,क्योकि यहां धुंध का प्रकोप ज्यादा रहता है।
नवंबर से फरवरी तक पड़ती है अधिक धुंध
ट्रैफिक विंग की ओर से पिछले साल जारी आंकडों के मुताबिक हर साल धुंध से 900 लोगों की मौत हो जाती है। 2018-19 में करीब 912 लोगों की मौत हुई थी। यह मौतें नवंबर से लेकर फरवरी तक जारी धुंध के कारण हुई थीं।
इन क्षेत्रों में पड़ती है सबसे ज्यादा धुंध
सूबे में सबसे ज्यादा धुंध गुरदासपुर, अमृतसर, फिरोजपुर, तरनतारन, पठानकोट और बटाला में पड़ती है। वहीं शिवालिक हिल्स वाले क्षेत्र रोपड़, होशियारपुर, नंगल और आनंदपुर साहिब में भी धुंध के कारण अधिक हादसे होते हैं।
धुंध को लकर ट्रैफिक पुलिस और ट्रांसपोर्ट विभाग लोगों को अवेयर करने का मिलकर काम करते है। अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे सभी उचित प्रबंध करें ताकि लोगों की जानमाल का नुकसान न हो।रजिया सुल्तान, ट्रांसपोर्ट मंत्री
मंडी गाेबिंदगढ़ में प्रदूषण स्तर खतरनाक जोन में
सूबे में किसानों ने पराली जलाना बंद कर दिया है, लेकिन माैमस में अाई गिरावट के कारण सूबे की अाबाेहवा अभी सांस लेने लायक नहीं है। बारिश हाेने के बाद ही इस जहरीली हवा से निजात मिल सकती है। शुक्रवार काे पंजाब पाॅल्यूशन कंट्राेल बाेर्ड (पीपीसीबी) से मिले अांकड़ाें के मुताबिक पिछले एक सप्ताह में मंडी गाेबिंदगढ़ का इयर क्वाॅलिटी इंडेक्स-336 रिकाॅर्ड किया गया, जाेकि खतरे के निशान से ऊपर है।